
2002 की गोली… 2019 की उम्रकैद… और अब 2026 का कोर्ट फैसला पत्रकार राम चंद्र छत्रपति मर्डर केस में ऐसा कानूनी मोड़ आया जिसने पूरे मामले की दिशा ही बदल दी।
हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
करीब दो दशक से चर्चा में रहे पत्रकार हत्या मामले में Gurmeet Ram Rahim Singh को बड़ी राहत मिली है। Punjab and Haryana High Court ने शनिवार को अपने फैसले में सीबीआई स्पेशल कोर्ट के निर्णय में संशोधन करते हुए डेरा प्रमुख को बरी कर दिया।
हालांकि अदालत ने इस मामले में दोषी ठहराए गए तीन अन्य आरोपियों कुलदीप, निर्मल और कृष्ण लाल की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी।
सीबीआई कोर्ट का पुराना फैसला
इस मामले में पहले Central Bureau of Investigation की स्पेशल कोर्ट ने डेरा प्रमुख को दोषी मानते हुए 2019 में उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
- 11 जनवरी 2019 को दोषी करार
- 17 जनवरी 2019 को सजा का ऐलान
इसके बाद राम रहीम और अन्य आरोपियों ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
अदालत ने क्यों दिया राहत का फायदा
हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान सबूतों और गवाहियों की विस्तृत समीक्षा की। कोर्ट का कहना था कि डेरा प्रमुख के खिलाफ आरोप “बिना किसी संदेह के साबित नहीं हो सके”। इसी आधार पर उन्हें benefit of doubt देते हुए आरोपों से मुक्त कर दिया गया।
लेकिन अदालत को बाकी तीन आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिले, इसलिए उनकी सजा को बरकरार रखा गया।

एक पत्रकार की हत्या से शुरू हुआ विवाद
यह मामला वरिष्ठ पत्रकार Ram Chandra Chhatrapati की हत्या से जुड़ा है। 2002 में छत्रपति ने अपने अखबार में डेरा से जुड़े कई गंभीर आरोप प्रकाशित किए थे। इन खबरों के बाद इलाके में काफी तनाव बढ़ गया था। इसी दौरान अक्टूबर 2002 में उन्हें गोली मार दी गई, जिससे पूरे देश में आक्रोश फैल गया।
CBI जांच और लंबी कानूनी लड़ाई
हत्या के बाद मामले की जांच बाद में CBI को सौंप दी गई। करीब दो दशक तक चली जांच, गवाही और अदालत की सुनवाई के बाद 2019 में स्पेशल कोर्ट का फैसला आया था।
अब 2026 में हाई कोर्ट के इस नए फैसले ने केस को फिर से राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है।
कानूनी और राजनीतिक हलकों में नई बहस
इस फैसले के बाद कानूनी विशेषज्ञों और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग इसे सबूतों की कमी पर आधारित न्यायिक फैसला बता रहे हैं, तो कुछ इसे भारत की सबसे विवादित कानूनी लड़ाइयों में से एक मान रहे हैं।
एक बात तय है पत्रकार छत्रपति की हत्या का मामला आज भी न्याय, राजनीति और मीडिया की आज़ादी पर बड़े सवाल खड़े करता है।
योगी और RSS की 2.5 घंटे की बंद कमरे की मीटिंग में क्या पका?
